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सुखी दांपत्य जीवन के लिए जरूरी है ये
संपादकीय द्वारा स्वामी चिदानन्द सरस्वती
मैं हमेशा एक शिकायत सुनता हूं, “हम छोटी-छोटी बातों पर झगड़ते रहते हैं। हर बात पर बहस हो जाती है।” इन झगड़ों का मुख्य कारण केवल अहंकार है। झगड़े के दौरान पति और पत्नी दोनों अपने-अपने मन में सोच लेते हैं कि वो बेहतर तरीके से सबकुछ समझते और जानते हैं और इसलिये वो हर काम को ‘अपने तरीके से’ करने का निर्णय ले लेते हैं। इस तरह का फैसला किसी को भी संतुष्टि नहीं देता और ना ही इस तरह के फैसले से बहस की समाप्ति होती है। हमारा अहंकार हमेशा यह सोचता है कि मैं हमेशा सही हूं और इसलिये आस-पास के लोगों को वही करना चाहिए जो मैं कहता हूं। युगल अक्सर छोटी-छोटी बातों पर लड़ना शुरु करते हैं जो बाद में एक बड़ी तकरार में तब्दील हो जाती है। अगर आप वाकई में उस झगड़े को बीच में रोककर पूछें, “आखिर आप किस मुद्दे पर लड़ रहे हैं?” तो शायद दोनों को इसका जवाब पता नहीं होगा। जीवन जीने का यह कोई तरीका नहीं है। हम झगड़ा करने या शिकायतों में इतना समय बर्बाद कर देते हैं कि हम भूल जाते हैं कि हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं। भगवान ने हमें जो दिया है, उन बातों के लिए हम उनका शुक्रिया अदा करना भूल जाते हैं।एक बार ऑस्ट्रेलिया में मैं एक लेक्चर प्रोगाम के लिए कार से जा रहा था। कार एक ट्रैफिक सिगनल पर आकर रुक गई। हमारे कार की खिड़कियां बंद थी, फिर भी हमारे आगे की कार से कुछ शोरगुल की आवाज आ रही थी। सामने एक बड़ी सी कार थी जिसके पीछे की सीट पर दो खूबसूरत बच्चे बैठे थे। उन्होंने बहुत अच्छे और नये कपड़े पहन रखे थे। बच्चे उन कपड़ों में बहुत जंच रहे थे लेकिन वो भय से कांप रहे थे और उनके आंखों से आंसुओं की धारा बह रही थी। सामने की सीट पर उनके माता-पिता बैठे थे जो एक-दूसरे पर इतनी तेज आवाज में चिल्ला रहे थे कि उनकी आवाज हमें भी सुनाई दे रही थी। उनके पास एक खूबसूरत कार थी, खूबसूरत बच्चे थे और वो अच्छे स्वास्थ्य के मालिक भी थे, लेकिन फिर भी एक-दूसरे पर चिल्ला रहे थे। चिल्लाने की वजह क्या थी? शायद वह मुद्दा बहुत ही छोटा होगा। शायद वह इसलिये गुस्सा होगा क्योंकि उसकी पत्नी ने तैयार होने में बहुत वक़्त लगा दिया होगा और इस कारण वो 15 मिनट लेट हो गये होंगे। या वह महिला इसलिये गुस्सा हुई होगी क्योंकि उसने अपने पति से टाई पहनने को कहा होगा और उसने ऐसा नहीं किया होगा। या फिर शायद महिला के पति ने पिछले सिगनल पर बाईं ओर गाड़ी मोड़ दी होगी जबकि उस महिला को सीधा रास्ता ज्यादा सही लग रहा होगा। इन लाखों चीजों में से वह एक कारण कुछ भी हो सकता है, लेकिन मुझे इस बात का यकीन था कि यह उनके साथ पहली बार नहीं हो रहा होगा। क्या हम एक गहरी सांस लेकर अपने अहंकार को खत्म कर आगे नहीं बढ़ सकते? क्या हर अवसर पर खुद पर इतना जोर डालना आवश्यक है? क्या एक क्षण के लिए भी हम किसी और के फैसले के साथ आगे नहीं बढ़ सकते? हमारे शरीर को सीमित
Sanjeev Kumar tripathi
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