Ankit
@ankitjnv
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poetry
चाहत से नफरतों को मिटाता चला गया। वो रूठते रहे मैं मनाता चला गया। कुछ इस तरह ग़ज़ल में कही अपनी दास्ताँ सब रो रहे थे और मैं सुनाता चला गया। जो मुस्कुराहटें थीं बहुत ही उदास थीं मैं आंसुओं को फिर भी हँस…