Baljinder Saroay
@baljindersaroay
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यूँ कहने को तो पहुँचा है ये इन्सां आस्मानों में
यूँ कहने को तो पहुँचा है ये इन्सां आस्मानों में मगर इंसानियत फिर भी यहाँ बिकती दुकानों में नहीं किरदार अब बाकी यहाँ के हुक्मरानों में ज़मीं तो खा चुके नज़रें गड़ी हैं आस्मानों में हमारे सर पे होगा शामिय…